एग्रीस्टैक पंजीयन में बड़ी लापरवाही उजागर, बुजुर्ग आदिवासी महिला किसान की 17 एकड़ जमीन दुसरे के नाम दर्ज, प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

Major negligence exposed in Agristack registration; 17 acres of land belonging to an elderly tribal woman farmer registered in someone else's name, raising questions about administrative procedures.

एग्रीस्टैक पंजीयन में बड़ी लापरवाही उजागर, बुजुर्ग आदिवासी महिला किसान की 17 एकड़ जमीन दुसरे के नाम दर्ज, प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

गरियाबंद : गरियाबंद जिले के सिवनी सहकारी समिति क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कामराज में एग्रीस्टेक पंजीयन से जुड़ी गंभीर लापरवाही सामने आई है. भरुवामुड़ा की बुजुर्ग आदिवासी महिला किसान फूल बाई मरकाम पति स्व लगन मरकाम की जमीन ग्राम कामराज और पेंड्रा में है. जो पिछले तीन महीनों से अपनी करीब 17 एकड़ कृषि भूमि को एग्रीस्टेक पोर्टल में सही कराने के लिए सहकारी समिति से लेकर तहसील, पटवारी और यहां तक कि कलेक्टर कार्यालय तक चक्कर काट रही है. लेकिन अब तक समाधान नहीं मिल पाया है. चौंकाने वाली बात यह है कि महिला किसान की करीब 17 एकड़ जमीन, अलग-अलग खसरा नंबरों के साथ किसी अन्य किसान के नाम पर पंजीकृत दिखाई दे रही है. लेकिन किसके नाम पर पंजीकृत है यह अब तक पता नहीं चल पाया है.
फसल कटाई और मिंजाई कर महिला किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने की तैयारी में थी. लेकिन एग्रीस्टेक पंजीयन में रकबा किसी और के नाम पंजीयन होने के कारण न तो टोकन मिल रहा है और न ही समिति में धान बेच पा रही हैं. बार-बार अधिकारियों के पास जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से किसान परिवार में भारी नाराजगी है.
ग्रामीणों और कृषक नेताओं का कहना है कि इतनी बड़ी भूमि का रिकॉर्ड किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत हो जाना गंभीर चूक है.
क्या एग्रीस्टेक पोर्टल में तकनीकी त्रुटि है?
या फिर फील्ड लेवल पर डाटा अपलोड करने में भारी लापरवाही हुई है?
इन सवालों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है.
वृद्ध किसान महिला ने बताया कि वे उम्रदराज होने के बावजूद रोज किसी न किसी कार्यालय में जा रही हैं. वहीं इस समस्या का समाधान नही सहकारी समिति, पटवारी, तहसीलदार न कलेक्टर कर पा रहे हैं. उन्हें कहीं से संतुष्टि पूर्वक जवाब नहीं मिल पा रहा है.
“धान तैयार है, मंडी बंद होने का डर है. लेकिन पंजीयन गलत होने से कोई मदद नहीं कर रहा। आखिर हम किसान जाएँ तो जाएँ कहाँ?”
स्थानीय किसानों का कहना है कि यह सिर्फ एक किसान की समस्या नहीं. बल्कि जिले में हजारों किसान एग्रीस्टेक पंजीयन, केरी फॉरवर्ड और रिकॉर्ड मिलान की समस्याओं से जूझ रहे हैं. ग्रामीणों ने तत्काल प्रशासन से-
गलत पंजीयन की जांच,
जमीन का रिकॉर्ड सही करने,
और किसान को जल्द टोकन जारी कर धान खरीद की सुविधा देने
की मांग उठाई है।
लगातार तीन महीने तक समाधान न मिलना यह दर्शाता है कि एग्रीस्टेक पोर्टल और राजस्व विभाग के समन्वय में गंभीर खामियां हैं. यह भी सवाल उठ रहा है कि जब किसान की जमीन राजस्व अभिलेख में स्पष्ट रुप से दर्ज है. तो पोर्टल में किसी अन्य किसान के नाम पंजीयन कैसे दिखने लगी?
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर मामले का जल्द निराकरण नहीं हुआ तो वे सहकारी समिति और तहसील कार्यालय के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
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जिनके खसरे एग्रीस्टेक पोर्टल आईडी में लिंक नहीं, वे समितियों में जाकर करवा सकते हैं अपडेट

एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत एक से ज्यादा खसरे वाले ऐसे किसान जिनके सभी खसरों में से कुछ खसरे पोर्टल में उनके एग्रीस्टेक आईडी में प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं. या लिंक होना बाकी रह गए हैं. ऐसे खसरों की पहचान कर समितिवार लिस्ट बनाई गई है. और उसे समितियों के बाहर चस्पा किया गया है.
किसानों से आग्रह किया जाता है कि वे समितियों में जाकर अपने छूटे हुए खसरों का मिलान कर उसे पोर्टल में लिंक करवा सकते हैं. इसके लिए किसान समितियों के किसान सहायता केंद्र में सुबह 9 से 5 तक समितियों में जाकर वहां के ऑपरेटर या ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं.
खाद्य अधिकारी  कबीरधाम ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी हेतु भारत सरकार, कृषि मंत्रालय के एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान पंजीयन अनिवार्य किया गया है. एग्रीस्टेक पोर्टल में किसान को मिली फार्मर आईडी के साथ उनके फॉर्म आई डी (खसरे) को लिंक किया जाना है. वर्तमान में एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत कृषक के ऐसे खसरे जो यूनीफाइड फार्मर पोर्टल में पंजीकृत थे. वो कैरी फारवर्ड हो गए है. लेकिन वो सभी खसरे एग्रीस्टेक में फार्मर आईडी के साथ लिंक नही है. उनमें से कुछ खसरे लिंक होने रह गए हैं. इन सभी छुटे हुए खसरों को एग्रीस्टेक पोर्टल में जरिए जोड़ा जाना है. ताकि समिति स्तर पर ये सभी खसरे खरीदी के लिए उपलब्ध हो सके. कबीरधाम जिले पंजीकृत किसानों के ऐसे 34 हजार 566 खसरे हैं जो किसानों के एग्री स्टेक आईडी में लिंक होने बाकी हैं. इन्हें लिंक कराने की प्रक्रिया किसान खुद समिति में जाकर करवा सकते हैं. इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित है.
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