अमलीपदर में राष्ट्रीय शौर्य समृद्धि 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का भव्य शुभारंभ, कलश यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, गांव में 3 दिन तक नहीं जलेगा चूल्हा
The grand inauguration of the National Shaurya Samriddhi 24 Kundiya Gayatri Mahayagna in Amlipada, a huge crowd gathered in the Kalash Yatra, the stove will not be lit in the village for 3 days.
गरियाबंद/अमलीपदर : माता जी की जन्म शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर अमलीपदर में राष्ट्रीय शौर्य समृद्धि 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का भव्य शुभारंभ ऐतिहासिक कलश यात्रा के साथ हुआ. इस मौके पर पूरा अमलीपदर क्षेत्र धर्ममय वातावरण में सराबोर नजर आया. गाजे-बाजे, वैदिक मंत्रोच्चार और जयघोष के बीच निकली कलश यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी.
तीन दिवसीय महायज्ञ शांतिकुंज हरिद्वार से पधारी टोली के मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है. टोली का नेतृत्व डॉ. अशोक धोके कर रहे हैं. आयोजन को कामयाब बनाने में अमलीपदर यज्ञ समिति अध्यक्ष निर्भय ठाकुर, संरक्षक श्रवण सतपथी, सेवन पुजारी, विनय पाण्डेय, पंकज मांझी सहित समिति के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
कलश यात्रा में अमलीपदर की सरपंच श्रीमती हेमो बाई नागेश, उपसरपंच चंद्रशेखर ठाकुर, रविंद्र मेघराज राजपुरोहित, गौतम जैन, हर्ष जैन, गायत्री शक्ति पीठ कांडेकेला के मुख्य ट्रस्टी केनू राम, समन्वयक देवशरण साहू, व्यवस्थापक उमाशंकर हंसराज, कोषाध्यक्ष प्रेम चक्रधारी सहित बड़ी तादाद में गणमान्य नागरिक, मातृशक्ति, साधक-भाई-बहन और श्रद्धालु शामिल हुए.
यज्ञ समिति से मिली जानकारी के मुताबिक गायत्री महायज्ञ तीन दिनों तक चलेगा. जिसमें रोजाना वैदिक अनुष्ठान, प्रवचन और साधना कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. यज्ञ में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई है. धार्मिक परंपरा के अनुरुप इन तीन दिनों तक पूरे अमलीपदर गांव में किसी भी घर में चूल्हा नहीं जलेगा. सभी ग्रामीण यज्ञ स्थल पर ही सामूहिक रुप से महाप्रसाद ग्रहण करेंगे.
दूर-दूर से श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा विशेष यातायात व्यवस्था लागू की गई है. ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो. यज्ञ स्थल और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.
आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि इस महायज्ञ में गायत्री परिवार के वरिष्ठ गुरुओं के पधारने की भी संभावना है. जिससे आयोजन का आध्यात्मिक महत्व और ज्यादा बढ़ गया है. कलश यात्रा की भव्यता और अनुशासन ने इसे ऐतिहासिक बना दिया. जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी.
कुल मिलाकर माता जी की जन्म शताब्दी वर्ष पर आयोजित यह 24 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ अमलीपदर के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक ऐतिहासिक अध्याय के रुप में दर्ज होने जा रहा है.
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