इलाज के नाम पर झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से गई दो जानें, एच शिड्यूल की दवाओं का धड़ल्ले से कर रहे इस्तेमाल, कार्रवाई कब?
Two lives lost due to negligence of quack doctors in the name of treatment, H schedule medicines are being used rampantly, when will action be taken?
गौरेला पेंड्रा मरवाही : झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से 2 दिनों में एक 12 साल की बच्ची सहित 2 लोगो की मौत के बाद भी झोलाछाप डॉ ग्रामीणों का इलाज करने से परहेज नहीं रहे. झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा बाकायदा कहीं किराए की दुकान में तो कहीं खुद के घर में कम पढ़े लिखे ग्रामीणों का इलाज करते हुए उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं. स्थानीय प्रशासन 2 लोगों की जान जाने के बाद भी सिर्फ विधिवत कार्रवाई किए जाने का भरोसा लोगों को दे रहा है.
दरअसल, आदिवासी बाहुल्य जीपीएम ज़िले में स्वास्थ्य के नाम पर झोलाछाप डॉ. चांदी काट रहे है. आरोप है कि ये लोग इलाज के नाम पर भोले-भाले कम पढ़े लिखे ग्रामीणों का जमकर शोषण कर रहे हैं. बीते दिनों 2 अलग-अलग मामलों में एक 12 साल की बच्ची खुशबू वाकरे (निवासी सिलपहरी) का इलाज भजवान दास नाम के झोलाछाप डॉ (निवासी पीपलामार) के द्वारा किया गया. इलाज के दौरान बच्ची की हालत नाजुक होने के बाद जिला अस्पताल जाने को कह दिया. लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई.
मृतक मरीज के परिजन राम पैकरा ने कहा कि बच्ची को इंजेक्शन लगाया और सीरप पीने को दिया. मुझे डॉक्टर का नाम नहीं पता है. यहां गांव के पास ही उनका दवाखाना है वहीं पर डॉक्टर बैठते हैं.
मरीज के परिजन भीखम सिंह ने कहा कि मेरे लड़को टायफायड था. गांव के ही डॉक्टर ने उसका इलाज किया. बीमारी की वजह से उसकी मौत हो गई.
एसडीएम विक्रांत अंचल ने कहा कि आप लोगों को द्वारा सूचना दी गई है. हमारी कोशिश है कि जो भी मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं. बिना डॉक्टरी डिग्री के इलाज कर रहे हैं उनपर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. शासन का सख्त निर्देश है कि ऐसे लोगों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाए.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t
दूसरी घटना भी उसी गांव से जुड़ी है. यहां पहलवान सिंह 27 साल(निवासी धनगवा) की मौत हो गई. मृतक पहलवान के पिता का कहना है कि टाइफाइड का इलाज गांव का ही झोलाछाप डॉ संजू पाठक कर रहा. इलाज के दौरान ही पहलवान की तबीयत और बिगड़ गई और अंत में उसकी मौत हो गई. इतना होने के बाद भी स्थानीय प्रशासन गम्भीर नजर नहीं आ रहा. झोलाछाप डॉ जो खुद को किसी एमबीबीएस डॉक्टर से कम नही समझते और बेधड़क एच शेड्यूल की दवाइयां इन ग्रामीणों के ऊपर प्रयोग कर रहे हैं. यहां तक की बीते दिनों मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ और खासी के दवाइयों से मौत के बाद भी ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टर खांसी और कफ की दवाइयां अपने पास रखे हुए हैं. ये दवाएं बिना किसी मापदंड के बच्चों और बुजुर्गों को खिला रहे हैं
हद तो तब हो गई जब पेंड्रा के आसपास ग्रामीण इलाकों में इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टर बिना किसी डिग्री के कोई किराने की दुकान की आड़ में लोगों का इलाज कर रहे हैं. कोई चांदसी दवाखाना के नाम पर तो कोई मेडिकल स्टोर की आड़ से दुकान के पीछे झोलाछाप डॉक्टरी कर रहा है. कुछ झोलाछाप डॉक्टर तो सिर्फ कुछ दिन तक मेडिकल स्टोर में काम करने के बाद खुद को दवाइयों का जानकार समझने लगे हैं.
पेंड्रा के दूरस्थ बम्हनी गांव में किराने की दुकान की आड़ में झोलाछाप डॉक्टर इलाज करने में व्यस्त हैं. वहीं, बकौली पारा इलाके में रहने वाला एक शख्स खुद को चाइल्ड स्पेस्लिस्ट समझकर मासूमों की जान से खिलवाड़ कर रहा है. जोगीसार गांव में रहने वाले युवक खुद आयुर्वेद कंपाउंडर है और घर में ही लोगों का अंग्रेजी दवाइयों से इलाज कर रहा है. हालांकि इस गंभीर मामले में स्थानीय प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है.
क्या होती है शेड्यूल एच की दवा: शेड्यूल एच भारत में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं का एक वर्ग है जो 1945 में बनाये गए ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1994 के परिशिष्ट के रुप में दिखाई देती है. शेड्यूल एच ऐसी दवाएं हैं जिन्हें योग्य डॉक्टर के पर्चे के बिना काउंटर पर नहीं खरीदा जा सकता.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t



