देह व्यापार के अड्डे पर ग्रामीणों का धावा, आपत्तिजनक हालत में रंगे हाथ पकड़ी गई चार महिलाएं, 4 युवक खिड़की से कूदकर फरार

Villagers raid a prostitution centre, four women caught red-handed in objectionable condition, four youths escape by jumping from the window

देह व्यापार के अड्डे पर ग्रामीणों का धावा, आपत्तिजनक हालत में रंगे हाथ पकड़ी गई चार महिलाएं, 4 युवक खिड़की से कूदकर फरार

महासमुंद : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के शांत और सरल गांव तुमगांव में उस समय सनसनी फैल गई जब ग्रामीणों ने एक गुप्त देह व्यापार अड्डे पर धावा बोल दिया. यह अड्डा लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों का केंद्र बना हुआ था. लेकिन जब गांव वालों का सब्र जवाब दे गया. उन्होंने खुद कमान संभालते हुए उस अड्डे पर छापा मारा और वहां से चार महिलाओं को आपत्तिजनक हालत में रंगे हाथों पकड़ लिया.
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक ये महिलाएं अलग-अलग जिला और और अलग राज्य की हैं. जिसमे रायपुर, अंबिकापुर, धमतरी एवं महाराष्ट्र से है और जिस मकान में यह धंधा चल रहा था यह मकान किसी अनीता नामक महिला का बताया जा रहा है और यह महिला पहले भी देह व्यापार वाले मामले अन्दर जा चुकी है.
ग्रामीणों ने फौरन इस शर्मनाक गतिविधि की खबर स्थानीय पुलिस को दी. जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को थाने ले जाया गया. ग्रामीणों के मुताबिक जैसे ही ग्रामीण अड्डे में प्रवेश किया. चार युवक खिड़की और पर्दे से कूदकर भाग निकले. यह घटना इलाके में सनसनी फैल गई और तुमगांव में गुस्से और आक्रोश की लहर दौड़ पड़ी है.
ग्रामीणों का कहना है कि यह अड्डा काफी समय से चल रहा था. कई बार स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी जानकारी दी गई. लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. यह देखकर गांववासियों ने खुद ही इस ‘शर्म की दुकान’ को बंद करने की ठानी.
एक बुजुर्ग ग्रामीण का कहना था कि “हमारे गांव में चल रहे इस गंदे काम को हम सब ग्रामीण बंद कराने पूरी तरह से बंद करना चाहते हैं. और हम सभी ग्रामीण हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं रहेंगे. अब अगर हम भी चुप रहते हैं. तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी”
नगर पंचायत अध्यक्ष की पीड़ा – “सच बोलने की सजा मिली!”
इस घटना से कुछ दिन पहले ही तुमगांव नगर पंचायत अध्यक्ष बलरामकांत साहू ने इस अवैध धंधे की शिकायत लेखबद्ध ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को दी थी. उन्होंने सार्वजनिक रुप से इस धंधे के खिलाफ आवाज उठाई थी. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि उन पर ही मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया.
ग्रामीणों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “अगर पुलिस इस गंदगी को साफ नहीं करेगी तो हम सब मिलकर तुमगांव की इस देह व्यापार की गंदगी को साफ करेंगे. क्योंकि कुछ दिन पहले हमारे नगर के नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा इस मुहिम को ज्ञापन के द्वारा उठाया गया था. लेकिन उनके खिलाफ मामला दर्ज कर के उनको ही जेल के अंदर बंद कर दिया गया.
कानून का डर या मजाक?
अब बड़ा सवाल यह उठता है – क्या तुमगांव में चल रहे इस देह व्यापारियों को कानून का कोई डर नहीं है?
या फिर प्रशासन की लापरवाही ने उन्हें बेलगाम बना दिया है?
यह धंधा तुमगांव के NH53 नेशनल हाईवे स्थित एक मकान में चल रहा था. जहां अक्सर संदिग्ध गतिविधियों की खबरें आती थीं. स्थानीय निवासियों ने बताया कि देर रात तक वहां अजनबी लोगों का आना-जाना बना रहता था. जिससे उन्हें शक हुआ और आखिरकार उन्होंने खुद कार्रवाई की.
पुलिस की कार्रवाई पर ग्रामीणों को भरोसा
पुलिस ने चार महिलाओं को हिरासत में लिया है. लेकिन अड्डे से भागे हुए युवकों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है. गांव वालों का आरोप है कि अगर पुलिस पहले सावधान जाती. तो आज इस हालत का सामना नहीं करना पड़ता. घटना की खबर मिलते ही तुमगांव की जनता में आक्रोश ज्यादा था. जिसको नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिभा पांडे थाना पहुंची और भीड़ को शांत किया. उनके द्वारा बताया गया कि अभी उन महिलाओं से पूछताछ जारी है. पूछताछ करने के बाद ही कानूनी कार्यवाही की जाएगी.
क्या इंसाफ मिलेगा?
तुमगांव की जनता अब इंसाफ की मांग कर रही है. उनका कहना है कि अगर जल्द से जल्द दोषियों को सजा नहीं दी गई. तो वे सड़क पर उतर कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे. खासकर जब एक जनप्रतिनिधि को ही प्रताड़ित किया जाए. तो आम आदमी किससे उम्मीद करे?
तुमगांव की आक्रोशित ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि “हमने अपने बच्चों के भविष्य के लिए आवाज उठाई है. हमें डर नहीं है- अब या तो ये धंधा बंद होगा. या फिर हम प्रशासन को चैन से नहीं बैठने देंगे.”
तुमगांव की यह घटना सिर्फ एक गांव की नहीं. बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है. क्या सच बोलने वालों को सजा मिलनी चाहिए? क्या अवैध धंधों पर रोक लगाने के लिए जनता को खुद पहल करनी पड़ेगी?
अब वक्त है कि प्रशासन और पुलिस आंखें खोले. नहीं तो ऐसे अड्डे सिर्फ तुमगांव में ही नहीं. हर कोने में पनपते रहेंगे.
तुमगांव की जनता ने हिम्मत दिखाई है अब देखना ये है कि कानून अपनी जिम्मेदारी निभाता है या फिर सिर्फ कागजों पर कार्रवाई होती है.
यह खबर एक चेतावनी है कि जब कानून की चुप्पी लंबे समय तक खिंचती है. तो जनता की आवाज गूंज बनकर उठती है. अब देखना ये है कि ये गूंज किसी बदलाव में तब्दील होती है या नहीं..
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