रायपुर में कारोबारी की कार से 2 लाख चोरी, पुलिस ही निकली चोर, पांच पुलिसकर्मी सस्पेंड, पीएम-सीएम पोस्टर विवाद के बाद उठ रहे सवाल
2 lakh rupees stolen from a businessman's car in Raipur, police officers turn out to be the thieves, five policemen suspended, questions raised after PM-CM poster controversy
रायपुर में कारोबारी की कार से 2 लाख चोरी, पुलिस ही निकली चोर, पांच पुलिसकर्मी सस्पेंड
रायपुर : राजधानी रायपुर की एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (एसीसीयू) टीम पर गंभीर आरोप लगा है. चेकिंग के दौरान क्राइम ब्रांच में पदस्थ पांच पुलिसकर्मियों ने उनकी कार से दो लाख रुपये चोरी कर लिया. शिकायत की गंभीरता को देखते हुए रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह ने सभी पांचों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया और मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं. वहीं चोरी का मामला भी दर्ज किया जाएगा.
18 अक्टूबर की रात रायपुर क्राइम ब्रांच को एक संदिग्ध कार की खबर मिली थी. इस खबर पर क्राइम ब्रांच की टीम कुम्हारी के रास्ते दुर्ग तक पहुंची. बताया गया कि टीम जब संदिग्ध वाहन की तलाश कर रही थी. उसी दौरान वह वाहन पुलिस को चकमा देकर गायब हो गया. इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम दुर्ग जिले के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र के विद्युत नगर इलाके में पहुंच गई.
दुर्ग निवासी शो-रुम कारोबारी मयंक गोस्वामी ने अपनी शिकायत में बताया कि वे धमतरी में बुलेट शोरुम के संचालक हैं. विद्युत नगर दुर्ग में रहते हैं. 18 अक्टूबर की रात वे धमतरी से अपने घर लौटे ही थे कि पीछे से रायपुर क्राइम ब्रांच की गाड़ी उनके घर पहुंची. टीम ने बिना किसी जानकारी या नोटिस के उनकी कार की तलाशी शुरु कर दी.
तलाशी के दौरान टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने उनकी कार में रखे दो लाख रुपये निकाल लिए. जांच के बाद जब रकम गायब पाई गई तो उन्होंने दुकान और घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच की. फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि चेकिंग के दौरान टीम के कुछ सदस्य कार में कुछ निकालते नजर आ रहे हैं.
पीड़ित कारोबारी ने यह सीसीटीवी फुटेज दुर्ग पुलिस को सौंप दिया. इसके बाद उन्होंने पूरी घटना की शिकायत दुर्ग एसएसपी से की. दुर्ग पुलिस ने मामले का प्रतिवेदन रायपुर एसएसपी को भेजा. जिसके बाद रायपुर एसएसपी ने क्राइम ब्रांच में पदस्थ आरक्षक प्रशांत शुक्ला, धनंजय गोस्वामी, प्रमोद वट्टी, अमित करिया और वीरेंद्र भार्गव को सस्पेंड कर दिया. साथ ही विभागीय जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है जो पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है.
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पीएम-सीएम पोस्टर विवाद के बाद उठ रहे सवाल
बिलासपुर/सीपत : सीपत थाना एक बार फिर विवादों के केंद्र में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का पोस्टर शौचालय के गेट पर लगाने के बाद मचे बवाल के बावजूद थाना प्रभारी गोपाल सतपथी को न सिर्फ बचा लिया गया. बल्कि उन्हें ससम्मान रेंज साइबर थाना भेज दिया गया. इस कदम ने पुलिस विभाग से लेकर आम जनता तक में सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर किस नेता या अधिकारी के संरक्षण में ऐसे अधिकारी बच निकलते हैं?
बताया जा रहा है कि बीते 15 दिनों के भीतर ही सीपत थाना प्रभारी के कई कारनामे सामने आ चुके हैं. इसके बावजूद उन्हें कार्रवाई से बचाकर लगातार संरक्षण दिया जा रहा है. इससे पहले थाना स्टाफ पर 185 की कार्यवाही की धमकी देकर अवैध वसूली और प्रताड़ना का मामला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचा था. पीड़ितों ने एसपी को लिखित शिकायत सौंपकर थाना प्रभारी पर संरक्षण देने का आरोप लगाया था. लेकिन कार्रवाई की गाज सिर्फ एएसआई सहेत्तर कुर्रे पर गिरी थी. जबकि टीआई गोपाल सतपथी को बचा लिया गया था.
अब 15 दिन बाद फिर सीपत थाना विवादों में है. थाना परिसर के सार्वजनिक शौचालय में सुशासन पखवाड़ा के तहत छत्तीसगढ़ शासन के मोनो के साथ लगाए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पोस्टर को गेट पर लगाने की घटना ने भाजपा कार्यकर्ताओं को भड़का दिया.
थाने के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ. लेकिन कार्यवाही के बजाय टीआई सतपथी का “प्रमोशन” कर उन्हें रेंज साइबर थाना भेज दिया गया. क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का अपमान करने वाले अधिकारी को सजा देने की बजाय सम्मान देना इस पूरे तंत्र पर सवाल खड़ा करता है. इतना ही नहीं, टीआई सतपथी पहले भी कई विवादों में घिर चुके हैं. चाहे क्षेत्र में अवैध शराब कारोबारियों को संरक्षण देना हो या चोरी की घटनाओं पर चुप्पी साधना.
बताया गया कि थाना से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर लगातार तीन बार चोरी होने के बाद भी उन्होंने एफआईआर दर्ज नहीं की. पत्रकारों द्वारा मामला एसपी रजनेश सिंह तक पहुंचाने के बाद ही एफआईआर दर्ज हुई.
अब सवाल यह है कि.. क्या कानून के रखवाले खुद कानून से ऊपर हो गए हैं? विवादों और गंभीर आरोपों के बावजूद ऐसे अधिकारी को लगातार संरक्षण क्यों मिल रहा है.. यह अब बिलासपुर पुलिस प्रशासन की साख पर बड़ा सवाल बन गया है.
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