अस्पताल में नवजात शिशुओं की अदला-बदली, 8 दिन बाद हुआ खुलासा, हिंदू मां को 10 दिन के मुस्लिम बच्चे से हुआ प्यार लौटाने से किया इंकार

Swap of newborn babies in the hospital, revealed after 8 days, Hindu mother refused to return the love she had for her 10-day-old Muslim baby

अस्पताल में नवजात शिशुओं की अदला-बदली, 8 दिन बाद हुआ खुलासा, हिंदू मां को 10 दिन के मुस्लिम बच्चे से हुआ प्यार लौटाने से किया इंकार

दुर्ग : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल के मैटरनिटी वार्ड से बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है. 23 जनवरी को पैदा हुए दो नवजात शिशु आपस में बदल गए.  दोनों ही नवजात लड़के हैं. परिवार को इस अदला-बदली की जानकारी 8 दिन बाद तब पता चली डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने ऑपरेशन के बाद खींची गई तस्वीरें देखीं. इसके बाद परिजनों के होश उड़ गए. एक परिवार ने दूसरे परिवार से संपर्क किया और यह बात बताई. लेकिन दूसरे परिवार ने बच्चा बदलने से यह कहते हुए मना कर दिया कि अब 8 दिनों में बच्चे से प्यार हो गया है.
23 जनवरी को शबाना कुरैशी (पति अल्ताफ कुरैशी) और साधना सिंह ने दोपहर क्रमशः 1:25 बजे और 1:32 बजे बेटों को जन्म दिया. अस्पताल में नवजात शिशुओं की पहचान के लिए जन्म के फौरन बाद उनके हाथ में मां के नाम का टैग पहनाया जाता है. जिससे किसी तरह की अदला-बदली न हो. इसी प्रक्रिया के तहत दोनों नवजातों की जन्म के बाद अपनी-अपनी माताओं के साथ तस्वीरें भी खींची गई.
हालांकि बाद में गंभीर लापरवाही सामने आई जब साधना सिंह लिखा हुआ बच्चा शबाना कुरैशी के पास चला गया और शबाना कुरैशी लिखा हुआ बच्चा साधना सिंह के पास चला गया. इस गलती का खुलासा 8 दिनों के बाद तब हुआ जब शबाना कुरैशी के परिवार ने ऑपरेशन के फौरन बाद ली गई तस्वीरों को देखा. तब परिवार ने ध्यान दिया कि उनके असली बच्चे के चेहरे पर तिल (काला निशान) नहीं था. जबकि जो बच्चा इस समय उनके पास है. उसके चेहरे पर तिल है.
यह जानकारी मिलते ही शबाना कुरैशी के परिवार में हड़कंप मच गया. उन्होंने फौरन जिला अस्पताल प्रशासन को इसकी जानकारी दी. जिससे अस्पताल में भी अफरा-तफरी मच गई. अस्पताल प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साधना सिंह और उनके परिवार को अस्पताल बुलाया. दोनों परिवारों और डॉक्टरों के बीच काउंसलिंग कराई. लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया.
साधना सिंह और उनके परिवार का कहना था कि बीते 8 दिनों में बच्चे से भावनात्मक लगाव हो चुका है. इसलिए वे बच्चे की वापसी के लिए तैयार नहीं हैं. इस वजह से मामला दिनभर उलझा रहा.और शबाना कुरैशी का परिवार समाधान के लिए अस्पताल में चक्कर लगाता रहा. लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला.
जब मामला सुलझता नहीं दिखा. तो प्रसूति विभाग की विभागाध्यक्ष ने शबाना कुरैशी के परिवार को थाने में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी. हालांकि सिटी कोतवाली पुलिस का कहना था कि इस मामले में पुलिस की कोई भूमिका नहीं है. और कार्यवाही की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की बनती है.
इस पूरे मामले में निजी मीडिया संस्थान के पत्रकार ने जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन और सिटी कोतवाली के थाना प्रभारी से बातचीत की. जिसके बाद रात 11:30 बजे यह सहमति बनी कि परिवार को प्रसूति विभाग में शिकायत पत्र देना होगा.
फिलहाल इस मामले में शबाना कुरैशी का परिवार अस्पताल की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहा है. लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. इस बीच जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. हेमंत साहू ने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह पूरी तरह प्रसूति विभाग का मामला है और इसकी जानकारी विभागाध्यक्ष डॉ. ममता ही दे सकती हैं.
कुरैशी परिवार अपने असली बच्चे को वापस पाने के लिए अड़ा हुआ है और अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही पर नाराजगी जता रहा है और अपने बच्चे को वापिस लेने की जिद मे अड़ा हुआ है तो दूसरी ओर हिंदू माँ को बच्चे से लगाव और प्यार हो गया है. और अब वह किसी भी कीमत पर मुस्लिम परिवार के 10 दिन के बच्चे को ना लौटने की जिद पर अड़ गई है. मामला अब अस्पताल प्रशासन और जिला अधिकारियों के संज्ञान में है. लेकिन समाधान निकालना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है.
इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दावों पर सवाल खड़े कर दिये हैं. मुस्लिम परिवार इंसाफ़ की मांग कर रहे हैं. लेकिन यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है. और कब बच्चे को असली मा की गोद नसीब होती है.
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