पत्थर खदान से घट गया गांव का जल स्तर, परेशान ग्रामीणों ने किया पंचायत चुनाव का बहिष्कार, किसी ने भी नहीं भरा नामांकन, लोकतंत्र उत्सव में नहीं लेंगे हिस्सा
The water level of the village decreased due to stone quarry, upset villagers boycotted the Panchayat elections, no one filed nomination, will not participate in the democracy festival.
बलौदाबाजार : चुनाव के दौरान अजब-गजब नजारे देखने को मिलते हैं. यही मौका होता है जब मतदाता प्रत्याशी या फिर प्रशासन के लिए काफी अहम हो जाता है. मतदाताओं के लिए भी ये मौका बहुत अहम हो जाता है. सालों से अपनी परेशानी से जूझ रहे लोग ऐसे मौके पर अपने मुद्दे को उठाते हुए नाराजगी का इजहार करते हैं. छतीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के एक गांव के लोगों ने अपनी ज्वलंत समस्या को लेकर सीधे पंचायत चुनाव का बहिष्कार कर दिया. यहां के कसडोल ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोट से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए किसी भी व्यक्ति ने नामांकन दाखिल नहीं किया. लोगों ने भी चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया है. इसके लिए गांव में बाकायदा मुनादी करवाई गई..
दरअसल लोग गांव के करीब चल रहे आशू क्रेशर खदान को बंद करने की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि खदान की गहराई बढ़ाने के साथ पूरे इलाके का पानी रसातल में पहुंच गया है. इससे पूरे गांव में जल संकट खड़ा हो गया हैं. शासन-प्रशासन से वे शिकायत करते थक गए लेकिन जिम्मेदारों ने कभी उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया.
जिम्मेदार अफसरों पर मिलीभगत का आरोप
गांव वालों का आरोप है कि इस मामले में जिम्मेदार अफसर खदानों के लोगों से मिलकर उनकी परेशानी को नजर अंदाज कर रहे हैं. ऐसे में उन्होंने चुनाव बहिष्कार के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि अफसर नेताओं की तानाशाही ने देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़े खोद दी हैं.
लोकतंत्र उत्सव में नहीं लेंगे हिस्सा
ग्राम पंचायत कोट के ग्रामीण अब अड़ गए हैं कि क्रशर खदान को बंद करें. वरना लोकतंत्र के उत्सव में भागीदारी नहीं बनेंगे. ग्रामीणों का कहना है कि खदान के चलते आसपास के गांव में जल स्तर घटने पर जल संकट और भूमि की उपजाऊ क्षमता में गिरावट जैसी समस्याएं आ रही हैं.
‘न चुनाव लड़ेंगे न वोट देंगे’ पूरे गांव में हुई मुनादी
कोट के ग्रामीणों ने पिछले हफ्ते पंचायत चुनाव के बहिष्कार का फैसला लिया. पूरे गांव में इसकी मुनादी भी कराई. प्रशासन को जैसे ही इसकी जानकारी मिली. ग्रामीणों से बात करने अफसर मौके पर पहुंचे. प्रशासन ने खदान को बंद करने की बात कहने की जगह खाली मान मन्नौवल की कोशिश की. ऐसे में नाराज गांव के किसी भी नेता ने चुनाव लड़ने के लिए अपना नामांकन दाखिल नहीं कराया है. लोगों का कहना है कि मांग पूरी न होने तक वे चुनाव में भाग नहीं लेंगे. खदान बंद करने की मांग पर वे अडिग है.
फसलों को हो रहा भारी नुकसान
यहां के ग्रामीणों ने बताया कि खदान की गहराई बढ़ चुकी है. इससे जल स्तर काफी नीचे चला गया है. गांव में पेयजल और निस्तार की समस्या पैदा हो गई है. खेतों में पानी नहीं रुकने से कृषि उत्पादन भी प्रभावित हुआ है. इसके अलावा खदान के कारण आसपास के गांव में धूल की परत जम गई हैं. इससे सैकड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि बंजर हो गई है. खदान में इस्तेमाल भारी विस्फोटकों से गांव के मकान भी क्षतिग्रस्त होने की बात कही जा रही है. हादसे के डर से ग्रामीण अक्सर आशंकित रहते हैं.
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