मुख्यमंत्री साय के कार्यक्रम से पहले पाण्डुका में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, विधायक रोहित साहू को काला झंडा दिखाने निकले सैकड़ों कार्यकर्ता गिरफ्तार

Major Congress protest in Panduka ahead of Chief Minister Sai's program; hundreds of workers arrested while setting out to show black flags to MLA Rohit Sahu.

मुख्यमंत्री साय के कार्यक्रम से पहले पाण्डुका में कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, विधायक रोहित साहू को काला झंडा दिखाने निकले सैकड़ों कार्यकर्ता गिरफ्तार

गरियाबंद: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले पाण्डुका में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. विधायक रोहित साहू को काला झंडा दिखाने निकले सैकड़ों कांग्रेसियों को पुलिस ने चारों धाम चौक पर रोककर गिरफ्तार कर लिया. इस दौरान गरियाबंद-रायपुर नेशनल हाईवे पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति निर्मित हो गई.
कांग्रेस कार्यकर्ता काली पट्टी और काले कपड़े पहनकर “रोहित साहू वापस जाओ”, “मुख्यमंत्री वापस जाओ” और सरकार विरोधी नारे लगाते रहे. विरोध प्रदर्शन के दौरान विधायक रोहित साहू का काफिला भी कुछ समय के लिए रुक गया. वहीं कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली. जिसके बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था संभालते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया.
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि खाद-बीज की समस्या, बढ़ती महंगाई और किसानों की परेशानियों को लेकर यह विरोध प्रदर्शन किया गया है. उन्होंने सरकार पर जनता की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया.
प्रदर्शन में प्रमुख रूप से ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रूपेश साहू, जिला सोशल मीडिया सह प्रभारी टिकेश साहू, पूर्व जनपद उपाध्यक्ष योगेश साहू, सोशल मीडिया प्रभारी रामगुलाल साहू, जिला महामंत्री चेतन सिन्हा, मुकेश भारती, खिलेश साहू, होरीलाल वर्मा, मनोज सोनवानी, देवेंद्र साहू, खेमराज सिन्हा, दुर्गा सिन्हा, योगेश्वरी साहू, हिमेश्वरी साहू, भुवनेश्वरी बंजारे, खेमू साहू, वासुदेव यादव, जगमोहन राजा, डॉ. राजेंद्र साहू, सुमंत मिरी, चिमन साहू, मोहन मांडले, दौलत यादव, सुदामा वर्मा, वासु साहू, दीपक आंडे, विक्की साहू, वसीम खान, जुबेर खान, डेविड ध्रुव, भूपेश शर्मा तथा राजेंद्र कुमार टोंडे सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी दी.
पाण्डुका में हुए इस प्रदर्शन ने मुख्यमंत्री के दौरे से पहले जिले की राजनीति को गर्मा दिया है. कांग्रेस ने इसे जनहित के मुद्दों की लड़ाई बताया. जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर कार्रवाई किए जाने की बात कही.
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CM के पहुंचने से पहले ही खाली हो गया पंडाल
गरियाबंद : मुख्यमंत्री के प्रस्तावित गरियाबंद दौरे में कार्यक्रम शुरु होने के पहले ही अजीब हालत बन गई जब कार्यक्रम शुरू होने के निर्धारित समय के कई घंटे बाद तक मुख्यमंत्री मंच पर नहीं पहुंचे और इंतजार करते-करते पंडाल में बैठी जनता वापस लौटने लगी. देखते ही देखते सैकड़ों लोगों से भरा पंडाल खाली होने लगा और अधिकारियों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगीं.
मुख्यमंत्री के जारी प्रोटोकॉल के अनुसार दोपहर 2:40 बजे गरियाबंद पहुंचने और 3 बजे से विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रमों में शामिल होने का समय निर्धारित था. कार्यक्रम में करीब 700 करोड़ रुपये से ज्यादा के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन प्रस्तावित था. लेकिन समय बीतता गया और मंच पर मुख्यमंत्री का इंतजार लंबा होता गया.
इंतजार लंबा, जनता का धैर्य छोटा
कई घंटों तक कुर्सियों पर बैठे रहने के बाद लोगों ने एक-एक कर कार्यक्रम स्थल छोड़ना शुरू कर दिया. हालात ऐसे बने कि मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंचने से पहले ही पंडाल का बड़ा हिस्सा खाली नजर आने लगा. कार्यक्रम स्थल का दृश्य देखकर ऐसा लग रहा था मानो जनता ने विकास से पहले घर वापसी को प्राथमिकता दे दी हो. पब्लिक को जाते देख मंच पर उपस्थित अधिकारी आनन फानन में उन्हें रोकने के लिए गेट की ओर दौड़ते दिखे.
व्यवस्था पर उठे सवाल
पूरे घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन की तैयारियों और कार्यक्रम प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर वीआईपी कार्यक्रमों में समय प्रबंधन और समन्वय बेहतर नहीं होगा तो जनता का उत्साह भी धीरे-धीरे कम होता जाएगा.
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर व्यवस्थाओं पर सवाल उठे हों. इससे पहले भी एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई थी. कई पत्रकारों ने कार्यक्रम कवरेज में आई दिक्कतों को सार्वजनिक रूप से उठाया था. ऐसे में ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रशासनिक प्लानिंग और समन्वय को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
खाली पंडाल बना चर्चा का विषय
राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं. लोग चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि “700 करोड़ के विकास कार्यों का इंतजार तो जनता कर सकती है. लेकिन तीन घंटे से ज्यादा का इंतजार शायद अब जनता भी नहीं करना चाहती.” वहीं कुछ लोग इसे प्रशासनिक प्रबंधन की परीक्षा में फेल होने जैसा बता रहे हैं.
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