राजनीतिक गलियारों में चरित्रहनन का बढ़ता चलन, मेयर प्रत्याशी के खिलाफ लगाया आरोप निकला झूठा, अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा निरस्त!
Character assassination is on the rise in political circles, allegation against mayor candidate turned out to be false, recommendation for disciplinary action cancelled!
बिलासपुर : नगर निगम के महापौर प्रत्याशी प्रमोद नायक के ऊपर कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत प्रत्याशी द्वारा लगाए गए खिलाफ में काम करने का आरोप जांच में असत्य पाया गया है. जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण द्वारा प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजे गए पत्र में प्रमोद नायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा को निरस्त करने कहा गया है.
नगर निगम के महापौर प्रत्याशी प्रमोद नायक को लेकर हाल ही में लगाए गए आरोपों की जांच पूरी हो गई है, और निष्कर्ष में यह सामने आया है कि उन पर लगाए गए आरोप असत्य थे. कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत प्रत्याशी द्वारा प्रमोद नायक पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था. जिसके बाद जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) ने इस मामले की जांच की.
जांच के बाद जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजे अपने पत्र में अनुशंसा किया कि प्रमोद नायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को निरस्त किया जाए. क्योंकि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार पाए गए हैं. इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चरित्रहनन की प्रवृत्ति और आंतरिक कलह को उजागर कर दिया है.
राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते अक्सर विपक्षी गुट एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं. लेकिन जब आरोप पार्टी के अंदर से ही उठे., तो यह संगठन के लिए भी एक चुनौती बन जाता है. प्रमोद नायक पर लगाए गए आरोपों का असत्य साबित होना इस बात को दर्शाता है कि कभी-कभी व्यक्तिगत या राजनीतिक मतभेदों के कारण बेबुनियाद आरोप लगाए जाते हैं. यह स्थिति न सिर्फ पार्टी के भीतर असंतोष को जन्म देती है. बल्कि जनता के सामने संगठन की छवि को भी प्रभावित करती है.
अब सवाल यह उठता है कि क्या पार्टी गलत आरोप लगाने वाले पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी? प्रमोद नायक के खिलाफ जो भी शिकायत की गई थी. वह अब गलत साबित हो चुकी है. ऐसे में पार्टी नेतृत्व पर यह जिम्मेदारी आती है कि वह यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में इस तरह की राजनीति को बढ़ावा न मिले.
अगर इस तरह के झूठे आरोपों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है. तो यह प्रवृत्ति और ज्यादा बढ़ सकती है. जिससे संगठन के अनुशासन और एकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. पार्टी को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में निष्पक्ष फैसला लेते हुए सख्त कदम उठाए. ताकि पार्टी की आंतरिक राजनीति स्वस्थ बनी रहे.
प्रमोद नायक के खिलाफ लगाए गए आरोपों का खंडन होने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपने राजनीतिक सफर को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं. साथ ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह इस मामले से सीख लेते हुए आंतरिक राजनीति को ज्यादा पारदर्शी और अनुशासित बनाने की दिशा में काम करेगा.
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सियासत में आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है. लेकिन जब यह आरोप सत्य की कसौटी पर खरे नहीं उतरते. तो इससे न सिर्फ व्यक्ति विशेष की छवि खराब होती है. बल्कि राजनीतिक संगठन की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है. अब देखना यह है कि पार्टी इस मामले को किस तरह संभालती है और क्या ऐसे झूठे आरोपों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं.
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