मोदी की गारंटी लागू करने प्रदेश भर में कर्मचारी-अधिकारियों का आंदोलन, बोले- 11 सूत्रीय मांगें पूरी नहीं हुई तो करेंगे अनिश्चित कालीन हड़ताल
Employees and officers protest across the state to implement Modi's guarantee, said- if the 11 point demands are not met then we will go on indefinite strike
रायपुर : छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारी बड़े पैमाने पर सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल पर चले गए हैं. हड़ताल से प्रदेशभर के शासकीय विभागों का कामकाज प्रभावित हो रहा है. यह हड़ताल छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले की जा रही है. फेडरेशन ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर यह कदम उठाया है. मंत्रालय से लेकर प्रदेश के सारे कलेक्टर कार्यालय नगर निगम कार्यालय के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है.
छत्तीसगढ़ प्रदेश राजपत्रित अधिकारी संघ की आपात बैठक इंद्रावती भवन में आयोजित की गई थी. बैठक में प्रदेश अध्यक्ष कमल वर्मा ने अधिकारियों को आंदोलन की रणनीति, मांगों की वैधता और सरकार की उदासीनता से अवगत कराते हुए आंदोलन को प्रदेशभर में कामयाब बनाने आह्वान किया गया था.
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने शुक्रवार को मोदी की गारंटी लागू करने के लिए 11 सूत्रीय मांगों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन शुरु कर दिया है. नवा रायपुर के इंद्रावती भवन में फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा के नेतृत्व में कर्मचारियों ने नारेबाजी के साथ शुरू किया.
फेडरेशन की प्रमुख मांगे क्या है?
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की ओर बताया गया कि छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन 22 अगस्त को अपनी 11 सूत्रीय मांग को लेकर जिला स्तर पर एकदिवसीय धरना प्रदर्शन कर रहा है. उनकी ये मांगे हैं :-
सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान दिया जाए
लिपिक, शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर संपूर्ण सेवा लाभ दिया जाए
पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए
सहायक शिक्षक और सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान दिया जाए
नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन एवं समयबद्ध पदोन्नति दी जाए.
अनुकंपा नियुक्ति नियमों में 10% सीलिंग शिथिलीकरण किया जाए.
प्रदेश में कैशलेश सुविधा लागू हो.
अर्जित अवकाश का नगदीकरण 300 दिवस किया जाए.
दैनिक, अनियमित एवं संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए.
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गरियाबंद : छत्तीसगढ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय इकाई के आह्वान पर कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन जिला गरियाबंद के सभी कर्मचारी-अधिकारी विधानसभा चुनाव के पहले मोदी की गारंटी को लागू करने के लिए स्थानीय रावणभाठा मैदान में एकदिवसीय हड़ताल के रुप आंदोलन किया. बरसते पानी में भी अधिकारी कर्मचारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और बड़ी तादाद में अपने अधिकारों के लिए सभी विभागों के सभी कैडर के अधिकारी और कर्मचारी इकठ्ठा हुए. कर्मचारियों की भीड़ इतनी थी कि आधे कर्मचारियों को पंडाल के बाहर खड़ा होना पड़ा.
विदित हो कि आंदोलन की रुपरेखा जारी होने के बाद ही सरकार ने कैबिनेट की बैठक में दो प्रतिशत महंगाई भत्ता देने की घोषणा की लेकिन अभी तक उनका आदेश प्रसारित नहीं किया गया. साथ ही देय तिथि और लंबित एरियर्स के बारे में कोई उल्लेख नहीं है. इस आधे अधूरे घोषणा पर फेडरेशन ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के साथ छल बताया. सभी कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्षों ने अपने अपने उद्बोधन में सरकार के रवैये पर नाराजगी प्रकट किया और अपने अपने कैडर की समस्याओं को मंच के सामने रखा.
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने एक स्वर में विधानसभा चुनाव के पहले मोदी की गारंटी के रुप में जारी किए गए घोषणा पत्र में सरकार द्वारा किए गए वादे के अनुरुप राज्य के कर्मचारी-अधिकारी एवं पेंशनरों को केंद्र के समान देय दिनांक से महंगाई भत्ता प्रदान करने, पूर्व के लंबित महंगाई भत्ते की एरियर्स राशि को जी.पी.एफ. खाते में समायोजित करने, समस्त कर्मचारी-अधिकारियों को सेवाकाल के दौरान चार स्तरीय समयमान वेतनमान प्रदान करने सहित अपने ग्यारह सूत्रीय लंबित मांगों पूरा करने अपनी आवाज बुलंद की.
फेडरेशन के इस चरणबद्ध आंदोलन के क्रम में प्रथम चरण 16 जुलाई को मुख्य मंत्री/मुख्य सचिव छत्तीसगढ शासन के नाम ज्ञापन सौंप कर मांगो को पूरी करने के लिए निवेदन किया गया था. लेकिन शासन की तरफ से फेडरेशन के 11सूत्रीय लंबित मांगो को लेकर शासन/प्रशासन की तरफ से सकारात्मक पहल नही होने की वजह से बाध्य होकर फेडरेशन की तरफ से प्रस्तावित आंदोलन के द्वितीय चरण में आगामी 22 अगस्त को सभी विभाग के कर्मचारी/ अधिकारी एक दिवस का अवकाश लेकर जिला मुख्यालय में आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए.
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संरक्षक प्रदीप वर्मा ने बताया कि शासन की तरफ से लंबित 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने की घोषणा तो की गई है लेकिन हमारी मांग केन्द्र के समान देय तिथि से प्रदाय करने की है जो रा नही किया गया. इस तरह से कर्मचारियों के प्रति की जा रही वादा खिलाफी से आक्रोशित होकर कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की तरफ से आंदोलन का आगाज किया गया है जो योजनाबद्ध तरीके से जारी रहेगा और मांग पूरी नहीं होने पर आगे तृतीय चरण में अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए मजबूर होंगे.
पटवारी, पंचायत सचिव और एनएचएम कर्मचारी पहले से ही हड़ताल पर
विदित हो कि छग राजस्व पटवारी संघ अपने संसाधन भत्ता, पदोन्नति, वेतन विसंगति की मांग को लेकर तथा एनएचएम कर्मचारी अपने नियमितीकरण एवं 27% लंबित वेतन जारी करने के साथ ही पंचायत सचिव संघ भी अपनी मांगों को लेकर पहले से हड़ताल पर हैं जो फेडरेशन के इस हड़ताल में शामिल रहे. कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन से संबद्ध सभी सगठनों एवं पदाधिकारियों ने जंगी रैली निकालकर रावणभाठा से कलेक्टर कार्यालय पहुँचे और मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा.
प्रदर्शन में ये रहे शामिल
प्रदर्शन में मुख्य रुप से संरक्षक प्रदीप वर्मा, बसंत त्रिवेदी महासचिव अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन, बसंत मिश्रा, सुदामा ठाकुर,मनोज खरे, मुकेश साहू, आर एन शर्मा, सुरेखा तिवारी, बसंत वर्मा, पिंटू साहू, किशोर साहू, रामनारायण मिश्रा, भगवान चंद्राकर, गुलशन यदु, पुरंदर वर्मा, नमिता भगत, यशवंत साहू, देवकुमार पडोटी, भागचंद चतुर्वेदी, योगेश्वर गोस्वामी, यशवंत सोनी, प्रवीण साहू, संजय महाडिक, हितकारनी देवांगन, लोकेश्वर सोनवानी, यशवंत साहू, कृष्णा कुमार सोनी,उमाशंकर साहू, जितेश गजभीये, पी आर सिदार, रविंद्र ठाकुर, डॉ. लक्ष्मीकांत जांगड़े, अनूप महाडिक,संजय मिश्रा,सतीश साहू, चेतन सोनकर, अशोक तिवारी, देवेंद्र वर्मा, डोमार कश्यप,कुबेर मेश्राम सहित सभी कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों व जिलाअध्यक्षों की मौजूदगी रही.
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अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन 11 सूत्रीय मांगों को लेकर एक दिवसीय हड़ताल कर स्थानीय गांधी चौक पर धरना दिया. अपनी लंबित समस्याओं और “मोदी की गारंटी” के तहत वादों को लागू करवाने की मांग को लेकर फेडरेशन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा है. कर्मचारियों का कहना है कि लंबित मुद्दों का समाधान नहीं होने से उनमें गहरा आक्रोश व्याप्त है.
फेडरेशन ने साफ किया कि अगर मांगों पर फौरन कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. ज्ञापन में बताया गया कि 18 जुलाई 2025 को भी कलेक्टरों के जरिए ज्ञापन सौंपा गया था. लेकिन अब तक ठोस पहल नहीं की गई.
फेडरेशन का कहना है कि ये मांगे सिर्फ कर्मचारियों के लिए नहीं बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी जरुरी है. अब देखना होगा कि सरकार कर्मचारियों की इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है.
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गौरेला पेंड्रा मरवाही : विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा मोदी की गारंटी के नाम पर कर्मचारियों से किए गए वायदे के पूरे नहीं होने से नाराज होकर कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले 11 सूत्रीय मांगों को लेकर समस्त कर्मचारी अधिकारी 22 अगस्त शुक्रवार को सामूहिक अवकाश लेकर ज्योतिपुर पेण्ड्रारोड में धरना प्रदर्शन किया. जिसमें कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन से संबद्ध कई विभागों के कर्मचारी संगठनों से हजारों की तादाद में जीपीएम जिले के कर्मचारी अधिकारी शामिल हुए और भाजपा सरकार पर वायदा खिलाफी का आरोप लगाते हुए धरना प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन पेण्ड्रारोड के तहसीलदार शेष नारायण जायसवाल को सौंपा.
कर्मचारी नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि भूपेश बघेल सरकार के समय जब कर्मचारी हड़ताल करते थे तो भाजपा के नेता उनके मंच पर आकर कहते थे कि अगर उनके पार्टी की सरकार बनेगी तो वो सभी मागों को पूरा करेंगे. कर्मचारियों का भरोसा जीतने के लिए भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव में मोदी की गारंटी के नाम से जारी घोषणापत्र में कर्मचारियों की मागों को शामिल भी किया और 100 दिन में उसे पूरा करने का वायदा भी किया. लेकिन सरकार बने 700 दिन होने के बावजूद एक भी वायदा पूरा नहीं किया. बल्कि केंद्र सरकार के समान देय तिथि से दिए जाने वाले मंहगाई भत्ता के मामले में भी भाजपा सरकार ने कर्मचारियों के साथ धोखा किया है. जिससे कर्मचारियों में असंतोष है.
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि 11 सूत्रीय मांगों को सरकार ने नहीं माना तो आने वाले समय में अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे. वहीं यह चेतावनी भी दिया कि जो भी सरकार कर्मचारी विरोधी नीतियां चलाती हैं. उस सरकार का पतन निश्चित है. धरना प्रदर्शन को प्रशासनिक अधिकारी संघ ने भी अपना समर्थन दिया था.
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कोरबा : छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर शुक्रवार को जिले में एक दिवसीय हड़ताल किया। हड़ताल में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए, जिससे कई शासकीय कार्यालयों का कामकाज प्रभावित रहा.
फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार के समान तिथि से प्रदेश के कर्मचारियों एवं पेंशनरों को महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) दिए जाने, वर्ष 2019 से लंबित एरियर्स को कर्मचारियों के जीपीएफ खाते में समायोजित करने तथा विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने जैसी बातें शामिल हैं.
इसी तरह चार स्तरीय पदोन्नति क्रमशः 8, 16, 24 और 32 वर्ष में देने, नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित मासिक वेतन एवं समयबद्ध पदोन्नति, कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने, अनुकंपा नियुक्ति पर 10 प्रतिशत की सीमा समाप्त करने, अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिवस करने और शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ देने की भी मांग की गई.
फेडरेशन ने सभी विभागों में अधिकारियों-कर्मचारियों की कमी को देखते हुए सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने तथा पंचायत सचिव, दैनिक वेतनभोगी, अनियमित व संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण कर स्थायी पदों पर पदस्थापना करने की भी मांग रखी. पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा.
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