बाइक टकराने से एक युवक की मौत, घंटों अस्पताल में इलाज नहीं मिलने से गरीब युवक की मौत, एक घायल, स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही से परिजनों में आक्रोश

A young man died after colliding with a motorcycle, another young man died after being denied treatment at the hospital for hours, another was injured, and family members were outraged by the health center's negligence.

बाइक टकराने से एक युवक की मौत, घंटों अस्पताल में इलाज नहीं मिलने से गरीब युवक की मौत, एक घायल, स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही से परिजनों में आक्रोश

बिलासपुर/मस्तूरी : प्रदेश की न्यायधानी बिलासपुर के सीपत स्वास्थ्य केंद्र में सिस्टम की लापरवाही से एक युवक की मौत हो गई. सड़क हादसे में गंभीर रुप से घायल दो युवकों को घंटों सीपत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज नहीं मिलने से एक युवक को ज्यादा खून बहने के चलते बीच रास्ते मौत की नींद सुला दी.
मिली जानकारी के अनुसार सीपत के में ग्राम कौड़िया में महाशिवरात्रि पर हर वर्ष लगने वाले तीन दिवसीय मेले में हजारों श्रद्धालु भोले बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इसी कड़ी में गांव जांजी के अमन सोनवानी अपने परिवार के साथ कौड़िया की ओर जा रहे थे. इसी दौरान सामने से आ रहे वाहन से टक्कर हो गई.
बताया गया कि पीपर शक्ति गांव के मोहन पल भी इस हादसे में गंभीर रुप से घायल हुए। फौरन किसी तरह घायल युवकों को सीपत के सरकारी अस्पताल लाया भी गया. परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक दोनों युवक नाजुक हालत में सरकारी अस्पताल में घंटों अस्पताल परिसर में गाड़ी में पड़े रहे. लेकिन अस्पताल में स्टाफ नहीं होने से उन्हें घंटों इलाज नहीं मिल पाया. और ना ही रेफर करने के लिए कोई एंबुलेंस आई.
इस मामले का वीडियो भी किसी ने बनाकर मीडिया तक पहुंचाया. वीडियो में घायल युवक के परिजन और तस्वीरें सिस्टम का पूरे काले सच की पोल खोलने के लिए काफी है कि किस तरह एक गरीब युवक को समय में सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई.
परिजनों का कहना है कि उस वक़्त अस्पताल में दो महिला स्टाफ और पुलिसकर्मी मौजूद थी. लेकिन उन्होंने फौरन इलाज के दिलाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. घंटों तक नाजुक हालत में युवकों के बारे में जब मीडिया के जरिए हादसे की खबर बिलासपुर एसएसपी को मिलते ही तत्काल अस्पताल में एंबुलेंस भी मदद के लिए पहुंची. लेकिन एसएसपी के फौरन मदद के सराहनीय प्रयास के बाद भी एक युवक ने इलाज में देरी में ज्यादा खून गिरने के कारण दम तोड़ दिया.
सिस्टम की लापरवाही के चलते एक गरीब युवक की मौत के बाद सवाल यह नहीं कि कौन गिरा और किसे चोट आई. सवाल यह है कि इतने भीड़भाड़ वाले आयोजन में सुरक्षा प्रबंधन और आपातकालीन प्राथमिक उपचार की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या प्रशासन ने ट्रैफिक नियंत्रण, एंबुलेंस और मेडिकल टीम की पूर्व व्यवस्था की थी?
कुछ दिन पहले सीपत मुख्य मार्ग पर तेज रफ्तार ट्रक ने एक दोपहिया चालक की जान ले ली. वह रोज की तरह काम पर निकला था. लेकिन लौटकर घर नहीं आया. ये घटनाएं महज हादसे नहीं, चेतावनी हैं. जब तक भीड़ प्रबंधन, सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी. तब तक ऐसी त्रासदियां दोहराई जाती रहेंगी.
अब हादसों की कीमत आम आदमी की जान से चुकाई जाएगी? सड़क पर निकलते समय अब सिर्फ ट्रैफिक का नहीं, सिस्टम की लापरवाही का भी डर सताने लगा. भीड़ उमड़ती है. लेकिन क्या व्यवस्था भी उतनी ही मुस्तैद रहती है? जांच और मुआवज़ा पर्याप्त नहीं. जरुरत है जवाबदेही की. ताकि अगली सुबह कोई घर अपने अपनों का इंतजार करते हुए खाली न रह जाए.
और सबसे बड़ा सवाल  यह है कि युवक की मौत का असली दोषी कौन है सिस्टम या अस्पताल में मौजूद मेडिकल स्टाफ या फिर मौजूद पुलिसकर्मी?? अब देखना होगा कि असली दोषियों पर कब और क्या कार्यवाही होती है. ताकि सिस्टम की लापरवाही से किसी और गरीब की मौत ना हो पाए.
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