भारत उन पांच देशों में शामिल, जहां सबसे ज्यादा लोग घोर गरीबी में जीवन यापन कर रहे, UN ने दिया ये चौंकाने वाला ताजा आंकड़ा
India is among the five countries where most people are living in extreme poverty UN gave this shocking latest figure
भले ही दुनिया चांद और सूरज की दूरी नाप रही हो और तरक्की के नित नये-नये आयाम गढ़ रही हो. लेकिन अभी भी तमाम देश गरीबी के दंश से उबर नहीं पाए हैं. अभी भी दुनिया में गरीबों की अच्छी खासी तादाद है. दुनिया भर के गरीबों का संयुक्त राष्ट्र ने जो आंकड़ा जारी किया है. उसे सुनकर आप भी चौंक जाएंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 23.4 करोड़ लोग घोर गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं. जिसे मध्यम मानव विकास सूचकांक में रखा गया है. भारत उन पांच देशों में है जहां पर घोर गरीबी में जीवनयापन करने वालों की तादाद सबसे ज्यादा है.
रिपोर्ट के मुताबिक भारत के अलावा अन्य चार देश पाकिस्तान (9.3 करोड़), इथियोपिया (8.6 करोड़), नाइजीरिया (7.4 करोड़) और कांगो (6.6 करोड़) हैं जिन्हे निम्न मानव विकास सूचकांक में रखा गया है.
संयुक्त राष्ट्र के ताजा आकंड़ों के मुताबिक दुनिया में एक अरब से भी ज्यादा लोग घोर गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं और इनमें से आधे बच्चे हैं. इनमें से 40 फीसदी लोग संघर्ष वाले या अस्थिर देशों में रह रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया में गरीबी को लेकर बृहस्पतिवार को एक जारी की है. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया कि 83% से ज्यादा गरीब लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं और इन लोगों के इतने प्रतिशत ही उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में रहते हैं. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और ऑक्सफोर्ड 2010 से ही हर साल बहु आयामी गरीबी सूचकांक जारी कर रहे हैं. जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवनस्तर सहित 10 संकेतकों को आधार बनाया जाता है.
जानें भारत का क्या है आंकड़ा
इस साल के सूचकांक में दुनिया के 112 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. जिनमें दुनिया की 6.3 अरब आबादी निवास करती है. सूचकांक के मुताबिक 1.1 अरब लोग घोर गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं. जिनमें से करीब आधे पांच देशों भारत (23.4 करोड़), पाकिस्तान (9.3 करोड़), इथियोपिया (8.6 करोड़), नाइजीरिया (7.4 करोड़) और कांगो (6.6 करोड़) में निवास करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक घोर गरीबी में रह रहे लोगों में करीब आधे यानी 58.4 करोड़ बच्चे हैं जिनकी उम्र 18 साल से कम है. उनमें से 31.7 करोड़ लोग उप सहारा अफ्रीका में रहते हैं. जबकि 18.4 करोड़ लोगों का निवास स्थान दक्षिण एशिया है.
इन देशों में बढ़ी गरीबी
यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में गरीबी बढ़ी है. गरीब बच्चों का अनुपात और भी ज्यादा करीब 59% है. यूएनडीपी और ऑक्सफोर्ड ने कहा कि इस साल की रिपोर्ट संघर्ष के बीच गरीबी पर केंद्रित है. क्योंकि 2023 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे ज्यादा संघर्ष हुए और युद्ध, आपदाओं और अन्य कारकों के कारण अब तक की सबसे ज्यादा तादाद यानी 11.7 करोड़ लोगों को अपने घरों को छोड़कर विस्थापित होना पड़ा. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम कार्यालय के निदेशक पेड्रो कॉन्सेकाओ ने बताया. ‘‘पहली बार वैश्विक ‘एमपीआई’ आंकड़ों के साथ संघर्ष के आंकड़ों को मिलाकर तैयार की गई रिपोर्ट उन लोगों की कठिन वास्तविकताओं को उजागर करती है जो एक साथ संघर्ष और गरीबी का सामना कर रहे हैं.’’
45 करोड़ से ज्यादा लोग बुनियादी जरूरतों से कर रहे संघर्ष
रिपोर्ट के अनुसार सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बहुआयामी गरीब और संघर्ष के माहौल में रहने वाले 45.5 करोड़ लोग, पोषण, पानी और स्वच्छता, बिजली और शिक्षा जैसी बुनियादी जरुरतों के गंभीर अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं और यह अभाव सामान्य क्षेत्रों के गरीबों के मुकाबले तीन से पांच गुना ज्यादा गंभीर होता है.’’ ऑक्सफोर्ड पहल की निदेशक सबीना अल्किरे ने कहा, ‘‘एमपीआई बता सकता है कि कौन से क्षेत्र गरीब हैं और लक्षित गरीबी उन्मूलन प्रयास उन क्षेत्रों में किए जा सकते है. उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए बुर्किना फासो में सैन्य शासन है और वहां चरमपंथियों के हमले बढ़े हैं. वहां की करीब दो तिहाई आबादी गरीब है.’
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