एथेनॉल प्लांट लगाने का विरोध, खेती-किसानी बचाने सड़कों पर उतरे किसान, झूठा मामला दर्ज कराने पर जिंदल पॉवर के खिलाफ भड़के ग्रामीण

Opposition to setting up of ethanol plant, farmers took to the streets to save agriculture and farmers, villagers got angry against Jindal Power for filing a false case

एथेनॉल प्लांट लगाने का विरोध, खेती-किसानी बचाने सड़कों पर उतरे किसान, झूठा मामला दर्ज कराने पर जिंदल पॉवर के खिलाफ भड़के ग्रामीण

खेती-किसानी बचाने सड़कों पर उतरे खपरी के किसान, एथेनॉल प्लांट लगाने के खिलाफ प्रदर्शन

दुर्ग : दुर्ग जिले के ग्राम खपरी के सैकड़ों ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और गांव में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट लगाए जाने खिलाफ अपनी बात रखी. ग्रामीणों ने साफ कहा कि इस उद्योग के लगने से उन्हें कई तरह के नुकसान होंगे. खासकर खेती-किसानी पर इसका सीधा असर पड़ेगा. उन्होंने कलेक्टर अभिजीत सिंह से मांग की कि इस प्रस्ताव को फौरन केंसल निरस्त किया जाए.
बता दें कि ग्राम खपरी में करीब 2,000 से 2,500 लोग रहते हैं और ज्यादातर लोग खेती के ही भरोसे हैं. गांव के सरपंच ने बताया कि हाल ही में उद्योग विभाग की तरफ से एक लेटर मिला है. जिसमें गांव में एथेनॉल प्लांट लगाने की योजना की जानकारी दी गई है. इसी के खिलाफ ग्रामवासी कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपना आक्रोश जताया.
ग्रामीणों ने एसडीएम थॉमस से भी मुलाकात की. एसडीएम ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी बातों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा. लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि वे सिर्फ आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं. जब तक लिखित में फैसला नहीं लिया जाता. वे विरोध जारी रखेंगे.
ग्रामीणों की यह मांग है कि गांव की कृषि व्यवस्था, स्वास्थ्य और पर्यावरण को बचाए रखने के लिए इस एथेनॉल प्लांट की योजना को फौरन रोका जाए. खपरी के लोग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं और आंदोलन के संकेत भी दे रहे हैं.
ग्रामीण महिला कुसुम ने कहा कि पहले से ही गांव में एक उद्योग केडिया कंपनी चल रहा है. जिससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है. कंपनी से निकलने वाला दूषित पानी खेतों में फैल रहा है. जिससे फसलों को नुकसान हो रहा है. अब अगर दूसरा उद्योग शुरु होता है. तो हालत और भी खराब हो जाएगी.
एक महिला ग्रामीण ने कहा कि पहले से ही कंपनी का असर बच्चों की सेहत और किसानों की ज़मीन पर दिख रहा है. हम खेती करने वाले लोग हैं. कंपनी लगने से न तो हमें रोजगार मिलेगा. न ही शुद्ध वातावरण.. किसी भी हालत में हम दूसरा उद्योग नहीं लगने देंगे.
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जिंदल पॉवर के खिलाफ भयंकर आक्रोश, तीन दिन से चल रहा आंदोलन, झूठा मामला दर्ज कराने पर और भड़के ग्रामीण

रायगढ़ : रायगढ़ जिला में तमनार समेत आसपास के ग्रामीणों में भयंकर नाराजगी है. जिंदल पॉवर की गाड़ियों से लोग दबकर रोज मर रहे है. इलाके के लोगों को न रोजगार मिल रहा है और न ही प्रभावित गांवों में कोई विकास हो रहा है. पीने का पानी तक उन्हें नसीब नहीं हो रहा है. यही वजह है ग्रामीण पिछले तीन दिन आंदोलन कर रहे हैं. आंदोलन को दबाने के लिए जिंदल पॉवर के प्रबंधकों ने ग्रामीणों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करा दिए हैं. जिससे ग्रामीण और भड़क गए हैं.
छत्तीसगढ़ के सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले तमनार क्षेत्र के ग्रामीण अब अनदेखी, अन्याय और अपमान के खिलाफ आर-पार की लड़ाई पर उतर आए हैं. जिंदल पावर लिमिटेड (जेपीएल) की मनमानी, शासन-प्रशासन की चुप्पी और स्थानीय संसाधनों की लूट से त्रस्त ग्रामीणों ने सीएचपी चौक लिबरा में आर्थिक नाकेबंदी की है. जो लगातार तीसरे दिन भी जारी रही. बुधवार को तहसीलदार और थानेदार ग्रामीणों को समझाइश देने पहुंचे लेकिन जब कोई लिखित आश्वासन नहीं मिला. तो लोगों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया.
इसके जवाब में जेपीएल के भू-अर्जन महाप्रबंधक रीतेश गौतम ने तमनार थाने में आंदोलनकारियों पर प्राथमिकी दर्ज करवा दी. FIR में स्थानीय निवासी राजेश मरकाम, कन्हाई पटेल, अजम्बर सिदार, शांति यादव और अन्य ग्रामीणों पर गाड़ी रोकने, गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है. बीएनएस की धाराओं 126(2), 296, 3(5) और 351(2) के तहत मामला दर्ज हुआ है. जिससे इलाके में तनाव फैल गया है.
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि ज़मीन-कोयला-पानी सब ले लिया. बदले में उन्हें क्या मिला ? सड़कों पर धूल, नलों में पीलापन, युवाओं के हाथ अभी भी खाली.. तमनार की धरती को कोयला, खनिज और पानी को चूसने वाले उद्योगों ने स्थानीय विकास के नाम पर कुछ नहीं दिया है.
* न तो गांवों में पक्की सड़कें हैं
* न साफ पीने का पानी
* न ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधाएं
* रोजगार में भी स्थानीय युवाओं की घोर उपेक्षा की जाती है. पुनर्वास नीति तो केवल कागज़ों तक सीमित है. यही वजह है कि ग्रामीणों ने ऐलान कर दिया है कि इंसाफ नहीं मिला तो लड़ाई और तेज होगी.

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें हैं :

* खदान हादसों में मारे गए ग्रामीणों के परिवार को नौकरी और मुफ्त शिक्षा
* ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई और गति सीमा का पालन हो
* ओडिशा सीमा तक सभी गाड़ियों की जांच
* नागरामुड़ा और मुड़ागांव में पेड़ों की अवैध कटाई पर रोक
* तमनार के ग्रामीणों का स्पष्ट संदेश है : हम लुटेंगे नहीं, अब लड़ेंगे
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