रायपुर में 150 करोड़ की सरकारी जमीन पहले किसानों के नाम चढ़ाई, फिर बेचा, रसूखदारों और अधिकारियों की सांठगांठ, खरीदी-बिक्री पर लगी रोक
In Raipur, government land worth 150 crore rupees was first registered in the names of farmers and then sold, in collusion between influential people and officials, and the purchase and sale were prohibited.
रायपुर : रसूखदारों को नियम-कायदों पर जरा भी भरोसा नहीं होता है. वो तो इसे अपनी मनमर्जी तो तोड़-मरोड़ लेते हैं. इसका ताजा उदाहरण राजधानी रायपुर में ही देखने को मिला है. जहां रसूखदारों से अधिकारियों से मिलीभगत कर राज्य गठन के बाद के सबसे बड़े जमीन घोटाले को अंजाम दिया है. जमीन की कीमत 150 करोड़ रुपए बताई जा रही है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जमीन घोटाले को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया. सबसे पहले घास और चराई जमीन को किसानों के नाम अलॉट किया गया. फिर इसी जमीन को शहर के दो नामी रसूखदारों की कंपनियों ने किसानों से खरीदा. इसके बाद इसी जमीन को देश की नामी मल्टीनेशनल कंपनी को बेच दिया गया. अब कंपनी इस जमीन पर प्लाटिंग कर लोगों को बेचेगी. इसके लिए कंपनी ने हाल ही में एक बड़ा विज्ञापन भी जारी किया है.
दस्तावेजों के मुताबिक शहर से लगे डोमा में (प.ह.नं. 84) की करीब 50 एकड़ जमीन आजादी के बाद से ही तहसील के रिकॉर्ड में घास और चरई जमीन के तौर पर दर्ज है. यानी यह जमीन को किसी को भी निजी तौर पर नहीं दी जा सकती. इसके बावजूद इस जमीन को मनोज यादव समेत कुछ किसानों को अलॉट किया गया. अलॉटमेंट किस आधार पर किया गया, ये भी नहीं बताया गया. बाद में इसी जमीन को स्वास्तिक प्रोजेक्ट्स और रूपी रिसोर्सेस प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों ने खरीद लिया. अफसरों ने भी बिना किसी जांच के करोड़ों की जमीन दो कंपनियों के नाम कर दी.
जमीन खरीदने वाले रसूखदारों के हौसले कितने बुलंद हैं. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रेरा में बगैर पंजीयन कराए ही जमीनों बिक्री शुरु कर दी गई. रेरा तक जब यह शिकायत पहुंची तो जमीन की खरीदी-बिक्री पर ही बैन लगा दी गई. रेरा की ओर से जारी आदेश के मुताबिक मेसर्स गोदरेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की रायपुर तहसील के डोमा में करीब 50 एकड़ जमीन (खसरा नंबर 213/2, 213/125, 15016, 15017/1 आदि) है. इस जमीन को सोशल मीडिया और विज्ञापनों के जरिए खरीदी-बिक्री के लिए प्रचारित किया जा रहा था.
पूरे मामले की शिकायत मिलने के बाद जांच कराई गई. इस प्रोजेक्ट का रेरा में पंजीयन ही नहीं था. इस वजह से इसे नियम का उल्लंघन मानते हुए क्रय-विक्रय पर रोक लगाई जा रही है. बताया जा रहा है कि इस मामले में तीन एजेंटों शशिकांत झा (पुणे), दीक्षा राजौर (मुंबई) और प्रॉपर्टी क्लाउड्स रियल्टी स्पेसिफायर प्राइवेट लिमिटेड (मुंबई) पर कार्रवाई भी की गई. तीनों को नोटिस भी जारी किया गया. और आगे की कार्रवाई की जा रही है.
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