बिलासपुर ट्रेन हादसे के बीच दिखा इंसानियत का शर्मनाक चेहरा, मृतकों के जेवर और घायलों के मोबाइल हुए गायब, जांच में जुटी पुलिस
The Bilaspur train accident reveals a shameful side of humanity; jewelry of the deceased and mobile phones of the injured disappear, and police investigate.
बिलासपुर : बिलासपुर में बीते दिन लालखदान इलाके में हुई भीषण ट्रेन दुर्घटना के बाद अब सभी मृतकों की पहचान कर ली गई है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे जोन के मुख्यालय बिलासपुर के नजदीक हुए इस हादसे में जान गंवाने वाले सभी यात्रियों के शवों का पोस्टमार्टम पूरा कर परिजनों को सौंप दिया गया है.
इस हादसे में मृतकों की पहचान देवरीखुर्द निवासी शिला यादव, अर्जुन यादव, मनमती यादव, प्रिया चंद्रा, गोदावरी यादव, रंजीत प्रार्थखेर, लवकुश शुक्ला, अंकित अग्रवाल, विद्या सागर (लोको पायलट), प्रमिला वस्त्रकार और गोती यादव के रुप में हुई है. इस हादसे में 11 यात्रियों की मौत की खबर की पुष्टि हो चुकी है. वहीं इस भीषण हादसे में घायल 20 से ज्यादा यात्रियों का इलाज बिलासपुर के जिला अस्पताल, रेलवे अस्पताल और अपोलो हॉस्पिटल सहित सिम्स अस्पताल में जारी है.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रारंभिक जांच में लोको पायलट विद्या सागर को हादसे का जिम्मेदार बताया जा रहा है. जांच टीम ने रेलवे बोर्ड को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि विद्या सागर को एक महिना पहले ही यात्री ट्रेन चलाने की अनुमति दी गई थी. इससे पहले वह मालगाड़ी चलाते थे. अब टीम लोको पायलट की ट्रेनिंग, काउंसलिंग, सिग्नल विजिबिलिटी और ड्राइविंग अनुभव जैसे बिंदुओं पर गहराई से जांच कर रही है.
वही इस हादसे में रेल के डिब्बों में फंसी जिंदगियों को बचाने के लिए रेल प्रशासन ,पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन पूरी मुस्तैदी से राहत और बचाव में बिना थके जीजान से जुटा नजर आया. रेस्क्यू के दौरान ट्रेन के अंदर से रुह को कपा देने वाली तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि यह एक्सीडेंट कितना खौफनाक और दर्दनाक रहा.
लेकिन इस बीच इंसानियत को शर्मसार करने वाली तस्वीरें भी सामने आईं. हादसे की अफरातफरी के बीच कुछ अज्ञात लोगों ने मौके का फायदा उठाया और मृत और घायल यात्रियों के कीमती सामान, जेवर और मोबाइल फोन चोरी कर लिए. मृत महिलाओं के गले से मंगलसूत्र और सोने-चांदी के आभूषण तक निकाल लिए गए. वहीं कई घायलों के बैग, मोबाइल और नकदी भी गायब पाए गए.
चश्मदीदों प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब राहतकर्मी मलबे में फंसे लोगों को बचाने में जुटे थे. उसी दौरान कुछ असामाजिक तत्व “मदद करने” के बहाने ट्रेन के डिब्बों में घुस गए और लूटपाट करने लगे. घटना के बाद परिजनों में गहरा आक्रोश है. उनका कहना है कि जब उनके अपने मौत से जूझ रहे थे. तब कुछ लोग मानवता को तार-तार कर रहे थे.
स्थानीय पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल पर मौजूद वीडियो फुटेज और चश्मदीदों के बयान के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है.
रेल हादसे में जहां एक तरफ बचावकर्मी और स्थानीय लोग दिन-रात एक कर घायलों की मदद में जुटे रहे. वहीं लूट की यह शर्मनाक वारदात हादसे के दर्द को और गहरा कर गई. यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि मुसीबत की घड़ी में इंसानियत की सबसे बड़ी परीक्षा होती है और अफसोस इस बार कई लोग उसमें असफल साबित हुए.
रेल प्रशासन हादसे के बाद पूरी तरह सतर्क है. घायलों के इलाज की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारी अस्पतालों में पहुंचे. लेकिन मीडिया से जानकारी साझा करने में कतराते नजर आए. रेलवे हॉस्पिटल में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जीएम ने घायलों से मुलाकात की. वहीं सीपीआरओ ने आधी-अधूरी जानकारी देकर स्थिति को संभालने की कोशिश की. अब सभी की नजरें उस उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि यह भीषण हादसा लापरवाही का नतीजा था या तकनीकी त्रुटि का परिणाम.? इस मामले में रेलवे के जिम्मेदार अफसरों ने मीडिया के सामने बयान देने से बचने की पूरी कोशिश की और जांच के बाद ही असल वजह साफ होने की बात भी कही.
फिलहाल मुंबई हावड़ा रेल यातायात को शुरू कर दिया गया है लेकिन अभी कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार किसकी लापरवाही से यह हादसा हुआ और 11 मौतों का असली दोषी कौन है?
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