वेयरहाउस में मां की आंखों के सामने उजड़ गई पूरी दुनिया, चने की बोरी के नीचे दबने से गोदाम में मजदूरी कर रही महिला के दो मासूम बच्चों की मौत
A mother's entire world crumbled before her eyes as she was buried under a sack of chickpeas. The two children of a woman working in a warehouse died.
भाटापारा : भाटापारा जिले के ग्राम धौराभाठा, थाना भाटापारा ग्रामीण स्थित बंशी गोपाल वेयरहाउस में सोमवार की शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया. जिसमें चने की बोरी के नीचे दबने से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई. मृतक बच्चे वेयरहाउस में कार्यरत महिला श्रमिक के बेटे-बेटी बताए जा रहे हैं. जो ग्राम बेलगहना, जिला बिलासपुर की निवासी है
मिली जानकारी के मुताबिक धौराभाटा गांव में स्थित बंशी गोपाल वेयरहाउस में विधवा महिला काम करती है. शाम करीब 4 बजे उसके दोनों बच्चे वेयरहाउस के अंदर खेल रहे थे. और उसी दौरान वे चने की झल्ली से चना निकाल रहे थे. इसी दौरान अचानक एक भारी चने का बोरा बच्चों के ऊपर गिर पड़ा. जिसके कारण वे बोरी के नीचे दब गए. पास में कार्यरत मजदूरों ने फौरन बोरा हटाकर बच्चों को बाहर निकाला. लेकिन तब तक दोनों की हालत नाजुक हो चुकी थी और वे बेहोश हो गए थे.
घटना के बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भाटापारा ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने चेकअप के बाद दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया. डॉक्टरों की शुरुआती जांच के मुताबिक बच्चों की मौत दम घुटने से होना मालूम हो रही है
मृत बच्चों की पहचान- 1️⃣ प्रतिमा पटेल, उम्र 6 साल2️⃣ अखिलेश पटेल, उम्र 5 साल है. हादसे के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और घटना स्थल का मुआयना किया. हादसे में लापरवाही के पहलुओं को लेकर पुलिस द्वारा जांच जारी है. घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है और वेयरहाउस प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं.
बता दें कि महिला पहले ही अपने पति को खो चुकी है. पति की मौत के बाद वही मजदूरी कर बच्चों का पालन-पोषण कर रही थी. काम पर जाना उसकी मजबूरी थी और बच्चों को साथ रखना उसकी बेबसी. अब इस हादसे ने उससे उसका आखिरी सहारा भी छीन लिया.
इस हादसे ने भाटापारा क्षेत्र की मीलों और वेयरहाउस में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है. इधर जानकारों का कहना है कि वेयरहाउस जैसे जोखिम भरे स्थल पर बच्चों की मौजूदगी रहने पर उन्हें खेलने के लिए सुरक्षित संसाधन नहीं दिए गए. साथ ही व्यवस्था पर सवाल भी उठाए कि चने की भारी बोरियों को रखने और स्टॉक करने के तय मानकों का पालन हुआ या नहीं? क्या वेयरहाउस प्रबंधन ने मजदूरों के बच्चों के लिए कोई सुरक्षित इंतजाम किया था?
अगर सुरक्षा नियम का पालन किया गया था. तो हादसा कैसे हुआ? क्योंकि स्थानीय लोगों का कहना है कि मजदूरों की मजबूरी को जानते हुए भी प्रबंधन ने सुरक्षा को नजर अंदाज किया है.
भाटापारा ग्रामीण थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरु करने की बात कही है. पुलिस का कहना है कि हादसे में लापरवाही के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. हालांकि स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि ऐसे मामलों में जांच अक्सर औपचारिकता बनकर रह जाती है और जिम्मेदार बच निकलते हैं.
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