आश्रम में रात को बुलाई गई महिला, गांव वालों ने मचाया जमकर हंगामा, कलेक्टर ने रंगरेलियां मनाने वाले वालों के खिलाफ लिया सख्त एक्शन

A woman was called to the ashram at night, the villagers created a ruckus, the collector took strict action against those celebrating the orgy

आश्रम में रात को बुलाई गई महिला, गांव वालों ने मचाया जमकर हंगामा, कलेक्टर ने रंगरेलियां मनाने वाले वालों के खिलाफ लिया सख्त एक्शन

बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर ज़िले से आई खबर ने एक बार फिर एजुकेशन विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है. बालक बालिका आश्रमों  की ज़िम्मेदारी सँभालने वालों की कारगुज़ारियों से एजुकेशन विभाग का शर्मसार होने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. ताज़ा मामला  पहाड़ी कोरवा आश्रम  कोठली का है. और ग्रामीणों के हंगामे के बाद मामले की लीपापोती की भी खबर है.
बता दें कि छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कलेक्टर ने आश्रम में रंगरेलियां मनाने वाले आश्रम के अधीक्षक को पद से हटा दिया है. साथ ही रात रुकने वाली शिक्षिका को सस्पेंड कर दिया है. दोनों पहाड़ी कोरवा बालक आश्रम में बिना किसी सूचना के रात रुके थे. जिसे ग्रामीणों ने रंगे हाथों पकड़ा था. इस मामला सामने आने के बाद आक्रोशित लोगों ने दोनों को घेर लिया था.
दरअसल पहाड़ी कोरवा आश्रम कोठली के अधीक्षक रंजीत कुमार ने बिना किसी सूचना के प्राथमिक शाला की शिक्षिका को रात में हॉस्टल में ठहराया था. जिसे वहां के छात्रों ने  रंगे हाथों पकड़े था. मामले की जानकारी मिलने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने दोनों को आश्रम के अंदर ही घेर लिया. फिर मामले की शिकायत बीईओ को दी गई.
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने 13 फ़रवरी की रात में फोन के जरिए सम्बंधित अफसरों को मामले की खबर दी. जिसमें कहा गया कि आश्रम अधीक्षक रंजीत कुमार आश्रम में महिला लेकर आए हैं. जो अधीक्षक रंजीत कुमार के साथ अवैधानिक रुप से शासकीय पहाड़ी कोरवा आश्रम में रुकी है. जिसे ग्रामीणों ने आश्रम के अन्दर घेर कर रखा है. जिसके बाद अधिकारी फौरन पुलिस बल के साथ घटना स्थल पर पहुंचे. पूरे मामले की जांच में सेजल मिंज को सिविल सेवा आचरण नियम की जानकारी होने के बाद भी लापरवाही करना पाया गया.
इस मामले की जांच के बाद बलरामपुर के कलेक्टर ने बड़ी कार्यवाही करते हुए शिक्षिका को सस्पेंड कर दिया है. साथ ही हॉस्टल अधीक्षक को भी पद से हटा दिया गया है. बीईओ ने इसे अमर्यादित और अशोभनीय के साथ-साथ बेहद गंभीर और अनुशासनहीनता बताते हुए प्रतिवेदन दिया था. पदीय दायित्व के खिलाफ गंभीर कदाचार करने की वजह से छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम के तहत कार्यवाही की गई है.
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