बच्चे के साथ क्रूरता करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गिरफ्तार, इधर बच्चों को घुन लगी दाल परोसने के मामले में जांच शुरु, 4 साल से चबूतरे पर चल रही पढ़ाई

Anganwadi worker arrested for cruelty to child, investigation launched into serving moth-infested lentils to children, schooling conducted on a platform for four years

बच्चे के साथ क्रूरता करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गिरफ्तार, इधर बच्चों को घुन लगी दाल परोसने के मामले में जांच शुरु, 4 साल से चबूतरे पर चल रही पढ़ाई

बच्चे के साथ क्रूरता करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गिरफ्तार

बिलासपुर : आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने चार साल के बच्चे को गोद लेकर बंधक बना लिया और उसके साथ मारपीट कर यातना देने लगी. चाइल्ड लाइन केयर ने कोटा पुलिस की मदद से कार्यकर्ता के घर में दबिश देकर बच्चे को उसके चंगुल से छुड़ाया. पुलिस ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं बच्चे को चाइल्ड लाइन केयर के कार्यकर्ता अपने साथ ले गए.
कोटा थाना प्रभारी मीना ठाकुर ने बताया कि चाइल्ड लाइन के सुपर वाइजर तोरवा स्थित मिश्रा हास्पिटल के पास रहने वाली स्वेता पति रोहित गुप्ता की शिकायत मिली. कोटा पड़ावपारा में रहने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राजकुमारी मैना पति राजकुमार ने चार साल के बच्चे रोशन को गोद लिया. वह बच्चे को बंधक बनाकर घर का सारा काम कराती है और उसके साथ मारपीट करती है.
गुरुवार को सुपर वाइजर श्रीमती गुप्ता ने अन्य कार्यकर्ताओं के साथ कोटा जाकर कोटा पुलिस की मदद से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राजकुमार भैना के घर में दबिश दी. आवाज लगाने के बाद भी महिला दरवाजा नहीं खोल रही थी. पुलिस के द्वारा दबाव बनाने पर उसने दरवाजा खोला. कार्यकर्ताओं ने पुलिस के साथ अंदर जाकर कमरे की तलाशी ली तो रोशन रस्सी से बंधा मिला.
पूछताछ में रोशन ने बताया, महिला नहीं भेजती है. पुलिस ने श्रीमती गुप्ता की रिपोर्ट पर किशार न्याय बच्चों के देखभाल 2015 की धारा 75 व बीएनएस की धारा 296, 115, 2 के तहत जुर्म दर्ज कर महिला को गिरफ्तार कर लिया है. बच्चा रोशन को चाइल्ड लाइन के कार्यकर्ता अपने साथ ले गए हैं.
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नौनिहालों को घुन लगी दाल परोसने के मामले में हरकत में आया विभाग, जांच करने फील्ड में उतरे अधिकारी-कर्मचारी

तखतपुर : आंगनबाड़ी केंद्रों में नौनिहालों को घुन लगी दाल परोसने के मामला सामने आया है. जिसके बाद महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया.  मामला जनपद पंचायत की सामान्य सभा में भी गूंजा। जहां जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों ने विभागीय अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर जमकर घेरा। वहीं अब इस मामले में विभाग हरकत में आया है और अधिकारी-कर्मचारी फील्ड पर निरीक्षण करने निकले.
सामान्य सभा में जनपद सदस्यों ने कार्यकर्ता और सहायिकाओं को नोटिस जारी करने के साथ खाना पूर्ति करने वाले परियोजना अधिकारी पर भी कड़ी नाराजगी जताई थी. सदस्यों ने सेक्टर सुपरवाइजरों पर लापरवाही छिपाने का गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी.
फटकार और लगातार बढ़ते दबाव के बाद विभाग आखिरकार मैदान में उतरा. महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने चूलघाट, पोंगरहिया, सुरीघाट, परसाकापा सहित कई आंगनबाड़ी केंद्रों का सघन निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान पोषण सामग्री, गर्म भोजन की गुणवत्ता, बच्चों की उपस्थिति और केंद्रों के संचालन से जुड़े सभी बिंदुओं की जांच की. अब देखना होगा कि कार्रवाई कितनी आगे बढ़ती है और नौनिहालों को गुणवत्तापूर्ण भोजन सुनिश्चित करने के लिए विभाग क्या ठोस कदम उठाता है.
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चबूतरे पर लटका भविष्य, साड़ी के पर्दे में कैद जर्जर आंगनबाड़ी, चार साल से चबूतरे पर चल रही पढ़ाई

सक्ती : सक्ती जिले के ग्राम मोहतरा में आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 1 की हालत इतनी खराब है कि सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. केंद्र की बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है… दीवारें टूट चुकी हैं… और मजबूरी में बच्चों की कक्षाएं गांव की एक घर के चबूतरे पर साड़ी का पर्दा लगाकर चलाई जा रही हैं.
दरअसल जिले में बच्चों का भविष्य… चबूतरे पर टंगा है. जहां मासूमों को पोषण और शिक्षा मिलनी चाहिए. वहाँ साड़ी का पर्दा लगा कर चल रहा है पूरा आंगनबाड़ी केंद्र!”
नियमों के मुताबिक आंगनबाड़ी केंद्रों में सुरक्षित बिल्डिंग, साफ-सफाई और बच्चों के लिए सुविधाएँ जरुरी है. लेकिन मोहतरा गांव आंगनवाड़ी केंद्र की हालत इन सभी मानकों को नज़र अंदाज करती दिखाई देती है.
सबसे बड़ी हैरानी यही है…कि बच्चे किस हाल में चार साल से पढ़ रहे हैं. और ज़िले का एक भी अधिकारी इन मासूमों को देखने तक नहीं आया!.
वही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भी मजबूरियाँ हैं. उनका कहना है कि भवन न होने से गांव के एक घर के चबूतरा में 4 साल से आंगनबाड़ी के छोटे-छोटे बच्चे पढ़ रहे हैं. जिससे काम प्रभावित हो रहा है. और मौसम बदलते ही बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा खतरा बन जाती है.
वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पंचायत के सहयोग से जल्द ही बच्चों के लिए बेहतर जगह और सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी. विभाग ने आश्वासन दिया है कि बच्चों को सुरक्षित और अनुकूल माहौल देना उनकी प्राथमिकता है.
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