मोहब्बत की मिली खौफनाक सजा, पांच परिवारों का सामाजिक बहिष्कार, जीते जी 4 लड़कों का करा दिया मृत्यु भोज, पैसे लेकर भी समाज में नहीं किया शामिल

Love was met with a horrific punishment: five families were socially boycotted, four boys were given a death feast while they were still alive, and they were not accepted into society even after receiving money.

मोहब्बत की मिली खौफनाक सजा, पांच परिवारों का सामाजिक बहिष्कार, जीते जी 4 लड़कों का करा दिया मृत्यु भोज, पैसे लेकर भी समाज में नहीं किया शामिल

बिलासपुर : बिलासपुर जिले में समानांतर सामाजिक अदालत चलाकर मानवाधिकारों के हनन करने वालों के खिलाफ, प्रेम विवाह करने वाले जोडों ने इंसाफ की गुहार लगाई है. झेरियानामा प्रजापति कुम्भकार समाज रतनपुर राज के पदाधिकारियों द्वारा अंतरजातीय प्रेम विवाह करने वाले सात स्थानीय युवकों का न सिर्फ हुक्का-पानी बंद कर दिया गया. बल्कि प्रताड़ना की सारी हदें पार करते हुए चार पीड़ितों के जीवित रहते ही उनका मृत्यु भोज संपन्न करा दिया.
क्या है यह मामला
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे पीड़ितों ने इंसाफ की गुहार लगाते हुए बताया कि रतनपुर राज के 13 नामजद पदाधिकारियों ने बिलासपुर, कोरबा और कवर्धा क्षेत्र के सात पीड़ित जोड़ों को कई साल से सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर रखा है. समाज के ठेकेदारों ने पीड़ितों के परिवारों पर भारी मानसिक दबाव बनाया और उनसे अवैध तरीके से मोटी रकम सामाजिक दंड के रूप में वसूल किया. 
अवैध वसूली के बाद पीड़ितों के माता-पिता और स्वजन को तो दोबारा समाज में शामिल कर लिया. लेकिन विवाह करने वाले जोड़ों का हुक्का-पानी आज भी बंद है. हद तो तब हो गई जब चार मामलों में समाज के पदाधिकारियों ने पीड़ितों को कागजी तौर पर मृत घोषित करवाकर उनके जीते जी कमार (गमी का भोज) खिलवा दिया.
पीड़ितों ने 10 मई को हुई सामाजिक बैठक में मिन्नतें की थीं. लेकिन पदाधिकारियों ने साफ मना कर दिया. प्रताड़ना से तंग आकर सभी पीड़ित जोड़ों ने बिलासपुर कलेक्टर से इंसाफ की गुहार लगाते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.
जीवित रहते करवा दिया मृत्यु भोज
ग्राम घुटकू कोनी निवासी सोमेश प्रजापति ने वर्ष 2016 में दीप्ति पटेल से अंतरजातीय विवाह किया था. पदाधिकारियों ने परिवार पर दबाव बनाकर सोमेश के जीवित रहते ही उनका सामाजिक मृत्यु भोज करवा दिया. परिवार से अवैध दंड वसूलकर उन्हें समाज में मिलाया गया. लेकिन सोमेश और उनकी पत्नी का हुक्का-पानी बंद कर उन्हें बहिष्कृत कर रखा है.
शादी-ब्याह और छठी कार्यक्रम पर पूर्ण रोक
मस्तूरी निवासी हरिशंकर प्रजापति ने वर्ष 2022 में भगवती श्रीवास से प्रेम विवाह किया. पदाधिकारियों ने उनके जीते जी परिवार से जबरन मृत्यु भोज कराया. पीड़ित जोड़े के सामाजिक आने-जाने, शादी-ब्याह, छठी कार्यक्रम और गमी में शामिल होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है. परिवार से जुर्माना वसूलने के बाद भी जोड़े को प्रताड़ित किया जा रहा है.
शादी के 12 साल बाद भी आतंक जारी
मस्तूरी के मनोज कुमार ने वर्ष 2014 में रीना ध्रुव गोंड़ से विवाह किया था. शादी के 12 साल बाद भी समाज के पदाधिकारियों का आतंक जारी है. मनोज के जीवित रहते हुए उनका मृत्यु भोज कराया गया. सामाजिक सिंडिकेट ने स्वजन को डराकर दंड वसूला और समाज में शामिल किया. लेकिन जोड़े को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है.
कवर्धा में शादी करने पर मिला यह दंश
तखतपुर क्षेत्र के सिंघानपुरी बाजार निवासी संजय कुमार ने वर्ष 2023 में कवर्धा की हेमलता ठाकुर से अंतरजातीय विवाह किया था. पदाधिकारियों ने उनके परिवार को डरा-धमकाकर संजय का जीते जी मृत्यु भोज संपन्न कराया. समाज के रसूखदारों ने परिवार से अवैध रूप से दंड की वसूली की. लेकिन पीड़ित जोड़े का सामाजिक बहिष्कार आज भी बरकरार रखा है.
पैसे ऐंठकर परिवार को अपनाया, मुझे छोड़ा
सिविल लाइन बिलासपुर निवासी रोशन प्रजापति ने वर्ष 2022 में छाया मानिकपुरी से अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था. रतनपुर राज के पदाधिकारियों ने विवाह के बाद रोशन का हुक्का-पानी बंद कर दिया. पदाधिकारियों ने उनके परिवार पर दबाव बनाया और सामाजिक दंड के नाम पर अवैध वसूली की. पैसे ऐंठने के बाद परिवार को अपनाया गया. पर रोशन को बहिष्कृत रखा है.
आवेदन देने पर बैठक में दुत्कारा गया
कोरबा पाली निवासी शिव कुमार ने वर्ष 2022 में रूखमणी साहू से विवाह किया. उन्होंने 15 अप्रैल 2026 को समाज को प्रार्थना पत्र भेजा. लेकिन 10 मई की बैठक में पदाधिकारियों ने उन्हें दुत्कार दिया. समाज के पदाधिकारियों ने मानवाधिकारों का हनन करते हुए परिवार से अवैध दंड वसूला और पीड़ित जोड़े का हुक्का-पानी बंद कर संकट में डाल दिया है.
11 साल पुराने मामले में आज भी भुगत रहे सजा
पोड़ी पाली निवासी अशोक कुमार प्रजापति ने वर्ष 2015 में मनीषा कंवर से अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था. 11 साल पुराने शादी के मामले में सामाजिक ठेकेदारों ने पीड़ित के परिवार पर दबाव बनाकर अवैध तरीके से जुर्माना वसूला. रकम वसूलने के बाद परिवार को तो समाज में वापस ले लिया गया. लेकिन अशोक और उनकी पत्नी को आज भी बहिष्कृत है.
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